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मौसम की स्थिति पर निर्भर धान की खेती
17 जुलाई 2017


पंजाब और हरियाणा में 15 मई से ही बुवाई शुरू हो गयी थी और लगभग सभी जिलों में धान की बुवाई पूरी हो चुकी है और धानों की रोपाई, गुड़ाई और निराई 15 जून से शुरू होने लगती है ।



लेकिन इस समय ध्यान देने योग्य यह है कि अधिक बारिश के मौसम में ज्यादातर ब्लास्ट नाम की बीमारी होने की आशंका अधिक रहती है । क्यूंकि धान के अंकुरण के बाद हवा और थोड़ी सूरज की रोशनी मिलना जरुरी होता है जोकि उत्पादकता और बीज की गुड़वत्ता के लिए महत्वपूर्ण है । और अगले सात दिनों के मौसम के मुताबिक पंजाब, हरियाणा और उड़ीसा में बारिश का माहौल बराबर बना हुआ है, और हलकी से मध्यम बारिश की सम्भावना है ।



और आद्रता भी इन क्षेत्रों में बनी हुई है जो कि ब्लास्ट बीमारी हो ये कोई नयी बात नहीं है ।
यह बीमारी धान की किसी भी स्टेज में हो सकती है लेकिन मुख्यतः सम्भावना सबसे अधिक वनस्पतिक स्टेज में ही होती है ।



इस बीमारी का मुख्य कारण नाइट्रोजन युक्त रसायनों का अधिक उपयोग करने से ही होता है । जैसे कि ट्राईसाईक्लाज़ॉल जिसका उपयोग साल्वेंट एक्सट्रैक्शन ऑफ़ एसोसिएशन के तहत भारत में बंद करने का प्रावधान रखा गया है क्यूंकि इसके उपयोग से कई बीमारियां होने की शिकायत मिली थी ।

इसलिए किसानों को यह सलाह दी जाती है कि इस रसायन का उपयोग ना करें । और समय समय पर पौधों से खरपतवार और अन्य घास-पूस वाले पौधे हटाते रहें । और रसायनों की जगह नीम के पत्ते उपयोग में ला सकते हैं इससे कीड़े मकोड़े रहने का डर कम रहता है साथ ही अगर आपकी नजदीकी दुकान पर अगर कोई रसायन जिसमें नाइट्रोजन की मात्रा कम हो उसका उपयोग करते हैं तो फफूंदी से होने वाली बिमारियों की आशंका कम रहेगी ।

ब्लास्ट बीमारी को रोकने के लिए आप फफूंदीनाशक हेक्सकोनाजॉल का उपयोग कर सकते है । और अन्य फफूंदीनाशकों में मैंकोजेब, कार्बेंडाजाइन का उपयोग भी लाभदायक रहेगा ।
बाकि और बीमारियां जोकि वनस्पति चरण के बाद भी आने की सम्भावना होती है उनके लिए खेतों के चारों ओर जमा हुए खरपतवार को जल्दी जल्दी हटाते रहे जिससे बीमारी कम रहने की सम्भावना रहती है ।

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